वक्त बीत गया तो लोग भुला देते है,
बे वजह अपनो को भी रुला देते है,
जो चिराग रात भर रौशनी देता है,
सुबह होते ही लोग उसे भी बुझा देतेहै।
संध्या समय है घटा है छायी घनघोर,
विस्मित आँखें निहार रहीं प्रीत के मन मोर,
आ जाओ तुम अगर, शाम सुहानी हो जाये,
मन हो शीतल - शीतल और नयन विश्राम हो जाये।।
पलके निहारती थक गयी रास्ता चहुँ ओर,
बादल भी बरस कर चले गये बरस बरस घनघोर,
यादों कि बारात लिये दूल्हा हूँ मै तेरा,
दुल्हन हो मेरे दिल की हर वक्त जुबां पर नाम है तेरा।
बे वजह अपनो को भी रुला देते है,
जो चिराग रात भर रौशनी देता है,
सुबह होते ही लोग उसे भी बुझा देतेहै।
संध्या समय है घटा है छायी घनघोर,
विस्मित आँखें निहार रहीं प्रीत के मन मोर,
आ जाओ तुम अगर, शाम सुहानी हो जाये,
मन हो शीतल - शीतल और नयन विश्राम हो जाये।।
पलके निहारती थक गयी रास्ता चहुँ ओर,
बादल भी बरस कर चले गये बरस बरस घनघोर,
यादों कि बारात लिये दूल्हा हूँ मै तेरा,
दुल्हन हो मेरे दिल की हर वक्त जुबां पर नाम है तेरा।
आज मन हुआ है फिर के भाव विभोर,
दर्श को अँखियाँ प्यासी तड़पत है मन मोर,
ज्ञान चक्षु बंद हुये जाने छाया है अंधकार,
ढाई अक्षर प्रेम के पढे़ जो आज भारी सब ओर।।
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