देखों रे देखों आई रे बहना मेरी, देखों रे बहना आई रे।
धागे से बाँधने डोर प्रीत कि राखी लाई रे मेरी, देखों रे बहना आई।।
त्योंहार है ये जो रक्षा बन्धन का,बहन-भाई के पवित्र सम्बन्ध का,
बन्धन के उस प्रीत कि रीत निभाने आई रे,देखों रे बहना आई रे।
देखों रे देखों आई रे बहना मेरी, देखों रे बहना आई रे।
धागे से बाँधने डोर प्रीत कि राखी लाई रे मेरी, देखों रे बहना आई।।
धागे का ये बन्धन है सबसे न्यारा,जिस पर है भाई बलिहारा,
बलिहार पर प्यार के हार चढा़ने आई रे,देखो रे बहना आई रे।
देखों रे देखों आई रे बहना मेरी, देखों रे बहना आई रे।
धागे से बाँधने डोर प्रीत कि राखी लाई रे मेरी, देखों रे बहना आई।।
देवतुल्य है आज भाई बहना कि आखों का तारा,
आखों में लिये किरण प्यार कि बहना मेरी आई रे,देखों रे बहना आई रे।
देखों रे देखों आई रे बहना मेरी, देखों रे बहना आई रे।
धागे से बाँधने डोर प्रीत कि राखी लाई रे मेरी, देखों रे बहना आई।।
राखी का एक-एक धागा, है कसम एक-एक रक्षासूत्र का,
सूत्र में गुनित एक-एक भाव कि याद दिलाने आई रे।
देखों रे देखों आई रे बहना मेरी, देखों रे बहना आई रे।
धागे से बाँधने डोर प्रीत कि राखी लाई रे मेरी, देखों रे बहना आई।।
कापीराईट सर्वाधिकार सुरक्षित :-
पुष्पेन्द्र सिँह मलिक "नादान"
धागे से बाँधने डोर प्रीत कि राखी लाई रे मेरी, देखों रे बहना आई।।
त्योंहार है ये जो रक्षा बन्धन का,बहन-भाई के पवित्र सम्बन्ध का,
बन्धन के उस प्रीत कि रीत निभाने आई रे,देखों रे बहना आई रे।
देखों रे देखों आई रे बहना मेरी, देखों रे बहना आई रे।
धागे से बाँधने डोर प्रीत कि राखी लाई रे मेरी, देखों रे बहना आई।।
धागे का ये बन्धन है सबसे न्यारा,जिस पर है भाई बलिहारा,
बलिहार पर प्यार के हार चढा़ने आई रे,देखो रे बहना आई रे।
देखों रे देखों आई रे बहना मेरी, देखों रे बहना आई रे।
धागे से बाँधने डोर प्रीत कि राखी लाई रे मेरी, देखों रे बहना आई।।
देवतुल्य है आज भाई बहना कि आखों का तारा,
आखों में लिये किरण प्यार कि बहना मेरी आई रे,देखों रे बहना आई रे।
देखों रे देखों आई रे बहना मेरी, देखों रे बहना आई रे।
धागे से बाँधने डोर प्रीत कि राखी लाई रे मेरी, देखों रे बहना आई।।
राखी का एक-एक धागा, है कसम एक-एक रक्षासूत्र का,
सूत्र में गुनित एक-एक भाव कि याद दिलाने आई रे।
देखों रे देखों आई रे बहना मेरी, देखों रे बहना आई रे।
धागे से बाँधने डोर प्रीत कि राखी लाई रे मेरी, देखों रे बहना आई।।
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पुष्पेन्द्र सिँह मलिक "नादान"
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