गुरुवार, 1 जनवरी 2015

बदलती दुनिया और हम २८ दिसम्बर २०१५


देखा है दुनिया में हर गिरेबा को बदलते हुये,
"नादान" हूँ शायद इसलिए हर अक्स में अपनापन ढूँढ़ता हूँ ।
बदलते समय के हरपल में इंसानियत का रूख बदलते देखा है,
इस दुनिया के दोस्तों के दस्तूर बदलते देखा है,
आप मिलाये या ना मिलाये,दोस्ती के कदम दोस्त के साथ,
हम ना बदले है ना बदलेंगे कभी, हमने दोस्तों के लिये अपना अक्स उजडते देखा है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें