शुक्रवार, 17 मार्च 2023
जिन्दगी एक नजर में दिनॉक १७ मार्च २०२३
सोमवार, 12 सितंबर 2022
मानव सेवा हेतु दिनांक १० सितम्बर २०२२
मैंने भी जलाई है ज्योति,
तुम रस बिखराओ तो सही,
इश्क़ भले अधूरा रह जाये,
प्यार होगा पूरा समर्पण का प्रण
निभाओ तो सही ।।
राह देखती है निगाहें गाहे–बघाये,
नज़र में आओ तो भान हो दिखे झलक ही सही
गलत सही का भेद समय बताता है,
जज़्बात सलामत कर कदम बढ़ाओ तो सही ।।
कर्म की गति बड़ी न्यारी है बड़ी प्यारी,
होगा प्रकाश जरूर दिया जलाओ तो सही,
पाप–पुण्य सब यही हैं पता चलेगा,
जीवन के दर्शन में एक बार नहाओ तो सही ।।
जीव तो जीव है प्यार करो अपनी जगह,
सदैव मंत्र रहा हमारा अतिथि देवो: भाव:,
भूल को भूलकर आत्मा को गुरुत्व कर,
बाल को पालकर मानव बनाओ तो सही ।।
रविवार, 12 जून 2022
नर और नारी जड़ चेतन दिनाँक १२ जून २०२२
शुक्रवार, 11 मार्च 2022
चोर खुद ही मचाता शोर दिनाँक १२ मार्च २०२२
मंगलवार, 22 फ़रवरी 2022
शर्म, दिनाँक २३ फरवरी २०२२
खानदान की कीमत पता चलती है हुस्न-ए-सलूक से,
अदब का हर पहलू इससे है, नजरों में थोड़ी हया कीजिये ।।
शुक्रवार, 4 फ़रवरी 2022
सरस्वती आराधना - बसन्त पञ्चमी दिनाँक ०५ फ़रवरी २०२२
वर्तमान इंसान दिनाँक ०४ फरवरी २०२२
शख्सियतों ने किरदार के कई रंग, चेहरे पर चढ़ा रखे हैं,खिलाड़ी हैं जो मंजे हुये, बदलने को पाला मैदान बचा रखे हैं ।।
दोगली फ़ितरत में, अहम के किरदार सज़ा कर,
कभी तेरे कभी मेरे बन, बीच फ़ासले बना रखे हैं ।।
कब कौन धोखा दे जाये, ये कौन जानता हैं,
लेकिन धोखा वहीं देते है, जो तूने अपने बना रखे हैं ।।
प्यारी आँखों की हया कैसे मरी, जो खोजने चलों,
बेशर्म किरदार कि परछाई के पीछे भी किरदार नज़र आते हैं ।।
द्वंद्व है धुंध है अहम की, हाथ को हाथ दिखता नहीं,
दीप जलाकर देखना, पीठ मुखौटे के चेहरे नज़र आते हैं ।।
मुकम्मल है "नादान" बहुत सीधा है भोला-भाला है,
मतलब के लिये लोग, जब-तब नीच घर पानी भर आते हैं ।।