शख्सियतों ने किरदार के कई रंग, चेहरे पर चढ़ा रखे हैं,खिलाड़ी हैं जो मंजे हुये, बदलने को पाला मैदान बचा रखे हैं ।।
दोगली फ़ितरत में, अहम के किरदार सज़ा कर,
कभी तेरे कभी मेरे बन, बीच फ़ासले बना रखे हैं ।।
कब कौन धोखा दे जाये, ये कौन जानता हैं,
लेकिन धोखा वहीं देते है, जो तूने अपने बना रखे हैं ।।
प्यारी आँखों की हया कैसे मरी, जो खोजने चलों,
बेशर्म किरदार कि परछाई के पीछे भी किरदार नज़र आते हैं ।।
द्वंद्व है धुंध है अहम की, हाथ को हाथ दिखता नहीं,
दीप जलाकर देखना, पीठ मुखौटे के चेहरे नज़र आते हैं ।।
मुकम्मल है "नादान" बहुत सीधा है भोला-भाला है,
मतलब के लिये लोग, जब-तब नीच घर पानी भर आते हैं ।।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें