शुक्रवार, 4 फ़रवरी 2022

सरस्वती आराधना - बसन्त पञ्चमी दिनाँक ०५ फ़रवरी २०२२

वर दे माँ वीणा वादिनी वर दे माँ सरस्वती,
हे कमलधारिणी वर दायिनी वर दे माँ सरस्वती,
तुझे पूजूँ माँ तुझे ध्याऊँ पल-पल,क्षण-क्षण तुझे रिझाऊँ,
वर दे माँ वीणा वादिनी वर दे माँ सरस्वती,
हे कमलधारिणी वर दायिनी वर दे माँ सरस्वती।।

प्रकृति सम श्रंगार कर वाणी का, हर मन में बस जाऊँ,
ज्ञान की ज्योति ऐसे जले, भवसागर तर जाऊँ,
तेरी कृपा की भिक्षा चाहूँ हे वीणा वादिनी माँ सरस्वती ।।

कदम-कदम ज्यों बढूँ सत्य मार्ग पर चलता जाऊँ,
निर्भय का वर दे वर दायिनी अभय हो विजय पाऊँ,
मन बसे कल्याण भावना ऐसा वर दे कमलधारिणी कल्याणी ।।
इन्द्रिय खुले तन-मन की समभाव सजे मेरे मन-मन्दिर में,
राग-द्वेष से कोसों दूर हो,वैरी भी अलंकृत हो जीवन में,
भारत सिरमौर बनें विश्वभर में,मैं बस जाऊँ जन-मन में ऐसा वर दे माँ सरस्वती ।।

वर्तमान इंसान दिनाँक ०४ फरवरी २०२२

शख्सियतों ने किरदार के कई रंग, चेहरे पर चढ़ा रखे हैं,

खिलाड़ी हैं जो मंजे हुये, बदलने को पाला मैदान बचा रखे हैं ।।


दोगली फ़ितरत में, अहम के किरदार सज़ा कर,

कभी तेरे कभी मेरे बन, बीच फ़ासले बना रखे हैं ।।


कब कौन धोखा दे जाये, ये कौन जानता हैं,

लेकिन धोखा वहीं देते है, जो तूने अपने बना रखे हैं ।।


प्यारी आँखों की हया कैसे मरी, जो खोजने चलों,

बेशर्म किरदार कि परछाई के पीछे भी किरदार नज़र आते हैं ।।


द्वंद्व है धुंध है अहम की, हाथ को हाथ दिखता नहीं,

दीप जलाकर देखना, पीठ मुखौटे के चेहरे नज़र आते हैं ।।


मुकम्मल है "नादान" बहुत सीधा है भोला-भाला है,

मतलब के लिये लोग, जब-तब नीच घर पानी भर आते हैं ।।



शनिवार, 7 अगस्त 2021

मरते है शीर्षक से दिनाँक ०७ अगस्त २०२१

जो मरते है वो ही जीवन धरते है,
तुम भी मरती और हम भी मरते है,
मरते है चल फिर एक दोनों बस एक बार,
मरते है एक दूजे पर जीने के लिये,
नयी दुनिया बसाते है दिखाते है,
उन्हें जो जी नहीं पा रहें देखकर,
राहों पर चलते प्यार की मेढ़ धर,
जितना दूर...... हो सकें जाते है,
नजरों से नहीं,
मानसिकता से आगे आते है,
कुछ बताते है,कुछ समझाते है,
यश-अपयश से दूर हो जाते है,
प्यार से धर्म और उसका कर्म जान, 
मिलकर दोनों एक राह नयी बनाते है,
आर्यों से अनार्यों तक जो आ चुके,
उन जिन्दा लाशों से दूर,
एक सुन्दर स्वप्न सजाते है,
चल मनुष्य है "नादान" 
मनुष्य की भाँति प्रेम सजाते है ।।
          

शुक्रवार, 6 अगस्त 2021

शिव महिमा दिनाँक ०६ अगस्त २०२१

शिव जोगी है शिव योगी है,
शिव की महिमा अपार,
शिव ही दाता शिव विधाता,
शिव ही मेरे तारण हार,
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ।।

तुम कैलाशी तुम अविनाशी,
तुम नीलकण्ठ तुम सन्यासी,
तुम रामेश्वरम तुम राम विश्वासी,
तुम ही मुक्ति धाम,
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ।।

तुम आदिदेव तुम विश्वेश्वर,
तुम मृत्युंजय, तुम ही विषधर,
तुम अनुरागी, तुम वाघाम्बर,
तुम दृष्टा तुम ही सृजनकार,
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ।।

तुम ही ज्योति, तुम ही लिङ्ग 
तुम प्रकृति के प्रत्येक अंग,
तुम  ही घालक, तुम ही पालक,
तुमरी शरण पड़ा "नादान"
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ।।
                



रविवार, 1 अगस्त 2021

मित्रता दिवस पर दिनाँक ०१ अगस्त २०२१

दोष तीन कर दे अलग,
मतलब, लालच, दाम,
दो सत्यवादी जब मिले,
है दोस्ती उसका नाम,
है अर्थ यही तो दोस्ती का,
दोनों में दोष ना हो कोई,
तन तो हो दो पर प्राण एक,
ईर्ष्या रोष ना हो कोई,
जिस रास्ते लोक हँसाई हो,
खुद चलें ना उसको चलने दें,
अपने ऊपर सब दुःख ले लें,
दिल ना दोस्त का दुखने दे,
क्या जिक्र यहाँ कर का जर का,
सर देने में इनकार न हो,
हर वक़्त दुआ यह दिल से हो,
गमगीन हमारा यार न हो,
सुख में बनते मीत जो ऐसे मित्र अनेक,
साथी हो जो दुःख के वो लाखों में एक,
मित्रता न ऐसा नाता है, 
जब जी चाहा जब छोड़ दिया,
मिट्टी का नाहीं खिलौना है, 
जो खेल-खेल में तोड़ दिया,
मित्र की हाँ जी में हाँ जी करना,
मित्रों को ना ही मुनासिब है,
लेन देन पर गौर करें, 
यह नहीं कभी भी वाजिब है,
चारों ओर की धुन्ध से मित्र आज विस्मित है, 
आज के युग कि रीत है बदली, 
जो हाँ जी हाँ जी करता है, 
"नादान" आज बस वही खुश किस्मत है ।।

गुरुवार, 22 जुलाई 2021

भाग्य दिनाँक २३ जुलाई २०२१

क्या करें ? 
जब भाग्य बड़ा बेशर्म है।।
कर्म ही धर्म है,
धर्म बेचारा क्या करें,
उसके साथ भाग्य है,
भाग्य को अगर लाज आये,
चले साथ साथ कर आबाद,
अन्यथा कर्म ही हिडोली में लटके रहो,
कर्म पर भी कर्म करते रहो,
खाली झोली को खाली करते रहो,
देखो मन्दिर मस्जिद गुरुद्वारे,
आस बाँध छवि उसकी निहारे,
लेकिन क्या करें भाग्य के मारे,
हाथ बाँधे खड़े बेचारे,
करते रहो कर्म,
हो ना हो साथ भाग्य,
आ जाये कब लाज वरन
भाग्य बड़ा बेशर्म है ।।

मंगलवार, 20 जुलाई 2021

साथ निभाओ तो कोई बात बने दिनाँक १५ जून २०१३

मीत का साथ निभाओ तो कोई बात बने।
गीत में साज बजाओ तो कोई बात बने।।
एक दिन मौज मनाने से क्या भला होगा?
रोज दीवाली मनाओ तो कोई बात बने।
इन बनावट के उसूलों में धरा ही क्या है?
प्रीत हर दिल में जगाओ तो कोई बात बने।
क्यों खुदा कैद किया दैर-ओ-हरम में नादां,
रब को सीने में सजाओ तो कोई बात बने।
सिर्फ पुतलों के जलाने से फायदा क्या है?
दिल के रावण को जलाओ तो कोई बात बने।
रूप की धूप रहेगी न सलामत नादां,
इश्क का ध्यान लगाओ तो कोई बात बने ।।