शुक्रवार, 13 नवंबर 2020

दशहरा दिन रविवार दिनाँक २५ अक्टूबर २०२०

मन रखकर पाप पुण्य का हर्ष मनाते हो,

एक रावण को मारने हर वर्ष रावण सजाते हो,

राम भजो तो राम आचरण ध्यान रखो,

मन मे बैठा रावण घर से तुम भी बाहर करो,

दश शीश है दश दिशायें चहुँ ओर  रावण की गर्जनाये,

शीश धरो ईश से अपने ही भीत से कर वज्र आकांक्षायें,

घर घर रावण है अपने घर बहुत से रावण है,

इस बार प्रण है बाहर निज घर से एक रावण है,

दशमी है विजय उत्सव की राम धीर वीर वर की,

दश शीश गिरा ईश बने पूजित मर्यादित कोशलाधीश की,

एक रावण बाहर कर मन अन्दर राम धरे,

प्रण धर काज करे राम राज्य स्वप्न साकार करे ।।

रविवार, 19 अप्रैल 2020

प्रकृति शिव है दिनाँक :- २० अप्रैल २०२०

सोच में मोच लगी,
दिमाग मे उठा कोहरा घना,
अहम का वहम पाल,
रावण विद्वान से हैवान बना,

हर शख्स में मैं है आज,
प्रकृति शिव है शिव ही सत्य है,
प्रकृति को बौना कर,
शून्य का सजाया ताज,

शून्य का नगण्य समझा मान,
शून्य की है अपनी आन,
कुछ नही कुछ में शून्य,
संग लगे अंग दस गुना तनती तान,

रोग का संयोग बन,
शून्य ने  दिखाया रंग,
प्रकृति ने इंसा को समझाया,
तू नही मैं हूँ अब भी समझे हर जन,

प्रकृति के नियम अटल है,
सत्य सत्ता की शरण लग,
इंसा समझ प्रकृति के खेल को,
शिव का दण्ड और प्रेम निश्छल है ।।

मंगलवार, 14 अप्रैल 2020

कोरोना वैश्विक संक्रमण दिनाँक १५ अप्रैल २०२०

सब शान्त है, सभी अशान्त है,ये कैसा द्वन्द्व है ? ।
प्रकृति का रौद्र रूप है अथवा,
मानव द्वारा विकसित कुपित कोप है,
कौन है नायक इसका, कोरोना है अथवा महायुद्ध है 
अर्थ के तन्त्र में विकसित चलित शीत युद्ध का फलस्वरूप है,
साम्राज्यवाद की अतिवादिता का मौन रूप है,
ये कैसा योद्धा है? अदृश्य है जो परमवीर है,
मुँह छिपाता जिससे हर शूरवीर है,
ये कैसा विषाणु है, नाम जिसका कोरोना है,
सब ओर त्राहिमाम है, दुःखी हर कोना- कोना है,
जिनफिंग की सौगात है ये पूरब का बेटा है,
बरपाने को कहर आगोश में अपनी, 
उसने दुनिया को समेटा है,
फिर भी कुछ साम्राज्य अछूते थे,
नागरिक भी उनके सीधे और सच्चे थे,
लेकिन उनमें एक वर्ग था आतातायी,
उसको ना बचने-बचाने को, कोई सीख सुहाई,
खुद तो डूबेंगे सनम तुम्हें भी साथ लेकर डूबेंगे,
उक्ति को पूरा करने की जैसे कसम है उन्होंने खाई,
मेरे देश का पूरे प्रदेश का है बुरा हाल किया,
जन-जन में विषाणु भरने का पूरा पूरा इंतजाम किया,
फिर भी धर्मानुयायियो ने अपने धर्म को पूर्ण अंजाम दिया,
विषधर जन का विष हरने को,जन-मन की पीर  हरने को,
राज-काज के प्रधान सेवक से इकाई के प्रथम सेवक तक, 
सभी ने अपने-अपने कर्म को पूर्ण-पूर्ण अंजाम दिया,
किसी ने तन से किसी ने धन से सब ने मिलकर,
मन से अपने हिस्से की जैसे सेवा की,
हो सकता है निपुण हो कर्म-धर्म-मर्म में विचारों से,
कम न समझना अन्य को ओर भी दक्ष है आचारों में,
"नादान" भी ऐसे में कहाँ था अनजान,
अपने मन कर्म वचन से उसने भी पूर्ण दिया अंजाम, 
कोरोना को हराने को अपने हिस्से का पयाम दिया,
ना किया दिखावा जो बन सके आयाम दिया,
तू भी न कर दिखावा, परोक्ष कर्म है भारी,
अनुशासित कर्म कर, अनुशासित कर्म है भारी,
कोरोना क्या बचेगा अनुशासन के योग से दुनिया है हारी ।।

बुधवार, 11 जुलाई 2018

प्यार की नींव दिनाँक १२जुलाई२०१८

हकीकत में ये पयाम हुआ है,
दोस्ती में वो हमारे नाम हुआ है ।।

कारवाँ निकला है जिस कूचे से,
वो कूचा भी बदनाम हुआ है ।।

निशाँ तक ना थे जिस गुनाह के,
मुकदमा उस ही के नाम हुआ है ।।

कर से करतब का कोई सबूत नही,
आला-ए-निगाह से गुनाह अंजाम हुआ है ।।

महरूम ना थे जिनसे कल तक,
आज उनसे प्यार का पैगाम हुआ है।।

अनपढ़ था आज तक निसार में,
ढाई अक्षर पढ़कर गहरा ज्ञान हुआ है ।।

शनिवार, 9 जून 2018

सुन्दरता पर मन का विचलन दिनाँक ०८ जून २०१८

सुहाना मौसम लगने लगा जब चेहरा उनका नज़र आया,
थी छायाकृति फिर भी लगा चाँद जमीं पर उतर आया ।।

न कह पाये कुछ न सुन पाये,
शब्द अधरों पर आकर रूक गये,
मायूसी छायी थी जो काफ़ूर हुयी,
जब चेहरा उनका नज़र आया,
उल्फत में पड़ गये खड़े खड़े,
लगा चाँद जमीं पर उतर आया।। १।।

उम्मीदें जो सफ़र में लगी थी,
को मंजिल नज़र आने लगी,
राहे थकान काफ़ूर नजर आयी,
जब चेहरा उनका नज़र आया,
सूनी वादियाँ सङ्गीत बजाने लगी,
लगा चाँद जमीं पर उतर आया ।।२।।

उम्र जब चाहत की दरकार कराने लगी,
ख्वाबों में नित नयी तस्वीर आने लगी,
मन का पपीहा राग तब गाने लगा,
जब चेहरा उनका नज़र आया,
मन कलिका खिल फूल बनने लगी,
लगा चाँद जमीं पर उतर आया ।।३।।

होने लगी कहानी जवानी कि रवानी जब,
नूर जब चेहरे का नैनों में नज़र आया,
बन्दगी आँखों ने आँखों की शुरू की,
जब चेहरा उनका नज़र आया,
मन्नतें नियामक होने लगी तब,
लगा चाँद जमीं पर उतर आया ।।४।।

तारें भी आसमाँ के नजदीक आने लगे,
ख्याली गुफ़्तगू के दरम्याँ तोड़ लाने लगे,
दूरियाँ सिमटकर कदमों में आने लगी,
जब चेहरा उनका नज़र आया,
चकोर की ललक बुझाने को जैसे,
लगा चाँद जमीं पर उतर आया ।।५।।


रविवार, 25 मार्च 2018

रामनवमी पर्व कैसे मनाऊँ दिनाँक २५ मार्च २०१८

कोख मारकर कन्या जिमायें,
रख कोख की आस,
गोद को बिसरायें,
होते हैं आज भी सीता हरण,
कैसे राम जन्म मनाऊँ ।।

राम पूजते गली गली,
घर घर रावण बैठे,
इंसानी वेश धर कर्म
गर्त का करतें जाते,
फिर भी राम भक्त कहलाते,
कैसे पहचान कराऊँ।।

मानव मर्यादा जो धरते,
जो बात मर्म की करते,
बिसरा कर कौशल्या,
सूपर्णखा को वरते
दशरथ भेजें आश्रम द्वार,
कैसे पूजन कर पाऊँ ।।

धन, बल, यश के लिये,
छल कपट दम्भ से जो जिये,
निति बुरी से नीति जो धरे,,
मान-मर्यादा त्यागकर लखन को सताये,
वही आज राम वेश धरे,
कैसे रामनवमी पर्व मनाऊँ ।।


गुरुवार, 4 जनवरी 2018

प्यार,धर्म ओर परामर्श दिनाँक ०४ जनवरी २०१८

उफ्फ .....
दो दिल ,
तीन लफ्ज़,
हजार ख्वाईशें,
बेइन्तहा मोहब्बत,
अकेलेपन से दूरी ,
आसान सी जिन्दगी,
विश्वास साथ,
धर्म के ठेकेदारों से अगर मिलें मुक्ति,
अगर राष्ट्र का कानून हो विकसित,
ना भय हो फिर से तीन शब्दों का,
सोच बनी हो परिपक्व अगर,
बन्द से बाहर निकलें जो,
खुला आसमाँ है उड़ान के लिये,
विश्व को परिवार जो मानते हैं हम ।।