मंगलवार, 22 दिसंबर 2020
अंश मेरी किस्मत से
शुक्रवार, 13 नवंबर 2020
दशहरा दिन रविवार दिनाँक २५ अक्टूबर २०२०
मन रखकर पाप पुण्य का हर्ष मनाते हो,
एक रावण को मारने हर वर्ष रावण सजाते हो,
राम भजो तो राम आचरण ध्यान रखो,
मन मे बैठा रावण घर से तुम भी बाहर करो,
दश शीश है दश दिशायें चहुँ ओर रावण की गर्जनाये,
शीश धरो ईश से अपने ही भीत से कर वज्र आकांक्षायें,
घर घर रावण है अपने घर बहुत से रावण है,
इस बार प्रण है बाहर निज घर से एक रावण है,
दशमी है विजय उत्सव की राम धीर वीर वर की,
दश शीश गिरा ईश बने पूजित मर्यादित कोशलाधीश की,
एक रावण बाहर कर मन अन्दर राम धरे,
प्रण धर काज करे राम राज्य स्वप्न साकार करे ।।
रविवार, 19 अप्रैल 2020
प्रकृति शिव है दिनाँक :- २० अप्रैल २०२०
मंगलवार, 14 अप्रैल 2020
कोरोना वैश्विक संक्रमण दिनाँक १५ अप्रैल २०२०
बुधवार, 11 जुलाई 2018
प्यार की नींव दिनाँक १२जुलाई२०१८
हकीकत में ये पयाम हुआ है,
दोस्ती में वो हमारे नाम हुआ है ।।
कारवाँ निकला है जिस कूचे से,
वो कूचा भी बदनाम हुआ है ।।
निशाँ तक ना थे जिस गुनाह के,
मुकदमा उस ही के नाम हुआ है ।।
कर से करतब का कोई सबूत नही,
आला-ए-निगाह से गुनाह अंजाम हुआ है ।।
महरूम ना थे जिनसे कल तक,
आज उनसे प्यार का पैगाम हुआ है।।
अनपढ़ था आज तक निसार में,
ढाई अक्षर पढ़कर गहरा ज्ञान हुआ है ।।
शनिवार, 9 जून 2018
सुन्दरता पर मन का विचलन दिनाँक ०८ जून २०१८
सुहाना मौसम लगने लगा जब चेहरा उनका नज़र आया,
थी छायाकृति फिर भी लगा चाँद जमीं पर उतर आया ।।
न कह पाये कुछ न सुन पाये,
शब्द अधरों पर आकर रूक गये,
मायूसी छायी थी जो काफ़ूर हुयी,
जब चेहरा उनका नज़र आया,
उल्फत में पड़ गये खड़े खड़े,
लगा चाँद जमीं पर उतर आया।। १।।
उम्मीदें जो सफ़र में लगी थी,
को मंजिल नज़र आने लगी,
राहे थकान काफ़ूर नजर आयी,
जब चेहरा उनका नज़र आया,
सूनी वादियाँ सङ्गीत बजाने लगी,
लगा चाँद जमीं पर उतर आया ।।२।।
उम्र जब चाहत की दरकार कराने लगी,
ख्वाबों में नित नयी तस्वीर आने लगी,
मन का पपीहा राग तब गाने लगा,
जब चेहरा उनका नज़र आया,
मन कलिका खिल फूल बनने लगी,
लगा चाँद जमीं पर उतर आया ।।३।।
होने लगी कहानी जवानी कि रवानी जब,
नूर जब चेहरे का नैनों में नज़र आया,
बन्दगी आँखों ने आँखों की शुरू की,
जब चेहरा उनका नज़र आया,
मन्नतें नियामक होने लगी तब,
लगा चाँद जमीं पर उतर आया ।।४।।
तारें भी आसमाँ के नजदीक आने लगे,
ख्याली गुफ़्तगू के दरम्याँ तोड़ लाने लगे,
दूरियाँ सिमटकर कदमों में आने लगी,
जब चेहरा उनका नज़र आया,
चकोर की ललक बुझाने को जैसे,
लगा चाँद जमीं पर उतर आया ।।५।।
रविवार, 25 मार्च 2018
रामनवमी पर्व कैसे मनाऊँ दिनाँक २५ मार्च २०१८
कोख मारकर कन्या जिमायें,
रख कोख की आस,
गोद को बिसरायें,
होते हैं आज भी सीता हरण,
कैसे राम जन्म मनाऊँ ।।
राम पूजते गली गली,
घर घर रावण बैठे,
इंसानी वेश धर कर्म
गर्त का करतें जाते,
फिर भी राम भक्त कहलाते,
कैसे पहचान कराऊँ।।
मानव मर्यादा जो धरते,
जो बात मर्म की करते,
बिसरा कर कौशल्या,
सूपर्णखा को वरते
दशरथ भेजें आश्रम द्वार,
कैसे पूजन कर पाऊँ ।।
धन, बल, यश के लिये,
छल कपट दम्भ से जो जिये,
निति बुरी से नीति जो धरे,,
मान-मर्यादा त्यागकर लखन को सताये,
वही आज राम वेश धरे,
कैसे रामनवमी पर्व मनाऊँ ।।