मेरे गाँव पर मुझे प्यार आता है,
बचपन की यादों का,ज्यों ज्यों ज्वार आता है,
मेरे गाँव पर मुझे प्यार आता है।।
वो मेरे खेत ओ खलियान,
जिनमे पंछी करते कलरव गान,
देते वो ऐसी तान,विह्नगम संगीत स्वर आता है।
बचपन की यादों का,ज्यों ज्यों ज्वार आता है,
मेरे गाँव पर मुझे प्यार आता है।।
बैलों के गले की घंटी,जब मयताल बजती है,
खेतों में मेहनतकश हरियाली यों सजती है,
क्या सावन क्या भादों, चमनबन खलियान गुलजार नजर आता है
बचपन की यादों का,ज्यों ज्यों ज्वार आता है,
मेरे गाँव पर मुझे प्यार आता है।।
वो नीम ओ बरगद की छाँव,गुड़गुड़ाते हुक्कों की तांव,
वो अखाड़े में पेलमपेल, वो कबड्डी का खेल,
पिता की डाँट,माँ का वात्सल्य,दादा-दादी का दुलार नजर आता है,
मेरे गाँव पर मुझे प्यार आता है,
बचपन की यादों का,ज्यों ज्यों ज्वार आता है,
मेरे गाँव पर मुझे प्यार आता है।।
जीवन का द्वन्द्ध है, धन की मारामारी,
शहरीकरण की सम्पन्नता में एकाकी बीमारी,
शाम की लालिमा आते, चौपाल पर यार नजर आता है।
बचपन की यादों का,ज्यों ज्यों ज्वार आता है,
मेरे गाँव पर मुझे प्यार आता है।।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें