बुधवार, 10 मई 2023

आज की हक़ीक़त (कड़वा सच) दिनाँक १० मई २०२३

सच्चाई की नज़र से ज़मींनीं हकीकत को देखा तो सितारा दूर नज़र आया,
ज़मींनीं बात को खुदी (स्वार्थ) के आईने से देखा तो मंजर दिखाया नज़र आया,
थी बात बस इतनी सी अहम के वजूद से जो मेरा न था मेरा नज़र आया,
ज़मींनीं बात को खुदी को दूर कर दुनियाँवी नज़र से देखा तो जमीं में मिला पाया।।

छल,बल के साथ जो चला मंज़िल–ए–मुक़ाम  पाने को वो सफ़ेद पॉश नज़र आया,
चाहत थी शिखर छूने की जिसकी वो शिखर पर चढ़ता ही नज़र आया,
सत्यमेव जयते मंत्र के साथ जो चलता रहा भरी धूप में मंजर धुंधला नज़र आया,
राजनीति के परिवेश में सच को कभी जीतता तो कभी हारता नज़र पाया।।

खत्म थी सांसे जिनकी मुर्दा थे शमशान में  बहुत सी ज़िंदा लाशों को चलता पाया,
ज़मीर की बात मत कर "नादान" वास्ते मतलब बहुतों का गिरता नज़र आया,
अहम के वहम से भरी दुनियाँ में मैं ही मैं बाक़ी थी बाकि ख़्वाब नज़र आया,
झूठ बिकता रहा सरे बाज़ार सच्चाई के आईने को काला नज़र पाया ।।

मंगलवार, 25 अप्रैल 2023

किसी के प्यार में दिनाँक १९ जुलाई २०१७

हम तो बताते रहे, वो समझे कहाँ हमारी बात,
वो समझदार थे ज्यादा, हम बेकार जज्बाती थे यार।।

उल्फत में भी उनको सीने में समाये रखा,
प्यार की बाते उनसे यूँ ही कह ना पाये यार।।

जबसे उनसे बात हुई वो अपने से ज्यादा अपने लगने लगे,
मुलाकात का वक्त मुक़र्रर न हुआ वो मुलाकातों में आने लगे यार।।

यूँ हर दम वो साथ है मेरे पर परछाई नजर नही आती,
वो रात बहुत हसीन हुई, जब से सपनों में वो आने लगे यार।।

सोमवार, 24 अप्रैल 2023

चाहत गीत – प्रेमी की चाहत में दिनाँक २२ अप्रैल २०२१

उसके बिन चुप चुप रहना अच्छा लगता है,
खामोशी से एक दर्द को सहना अच्छा लगता है।।

जिस हस्ती की याद में आँसू बरसते हैं,
सामने उसके कुछ ना कहना अच्छा लगता है।।

मिलकर उससे बिछड़ ना जायें डरते रहते हैं, 
इसलिये बस दूर ही रहना अच्छा लगता है।।

जी चाहे सारी खुशियाँ लाकर उसको दे दूँ,
उसके प्यार में सब कुछ खोना अच्छा लगता है।।

उसका मिलना ना मिलना किस्मत की बात है,
पल पल उसकी याद में खोना अच्छा लगता है।।

शनिवार, 18 मार्च 2023

सफ़र एक आईने से दिनॉक १९ मार्च २०२३

सफ़र को तुम भी खड़े थे, हम भी खड़े थे,
दोनों ही चलने को तैयार खड़े थे ।।

सफ़र दोनों का था एक ही जैसा,
दोनों के रास्ते कांटों भरे थे ।।

राहें सफ़र आसान न था दोनों के लिये,
हम प्यार संग चले तुम मतलब साथ चले थे।।

चुनी राह दोनों ने आगे बढ़ने की खातिर,
तुम ही क्यों ? निकले आगे, हम वहीं खड़े थे ।।

निकले जो आगे ध्यान उन्हीं पर था हमारा,
सशक्त हम ज्यादा थे, पर विभीषण तेरे संग चल पड़े थे ।।

देखा जो झाँककर अपने सफ़र को आईने में,
कुछ अपने ही थे जो टांग को खींचे पड़े थे ।।

जिन्दगी की दौड़ से हर बार पाया हमनें ये सबक,
"नादान" थे बड़े संजीदा,तुम मतलबी बड़े थे ।।

शुक्रवार, 17 मार्च 2023

जिन्दगी एक नजर में दिनॉक १७ मार्च २०२३

कभी इधर गया कभी उधर गया,
जिधर भी गया खराब थे उधर के रास्ते ।।

ढेर था विचारों का, हृदय उमंग भरा था,
न कह सका न सुन सका, मन भरा भरा था।।

शिकवा करता क्या किसी से सभी अपने थे,
बैठा जब भी खाली मन सुलझाने मन के फासले।।

कोशिश बेकार गयी हर बार, मुकम्मल करने की,
संजीदा जब भी हुआ, सुधार के वास्ते।।

चल रही है गाड़ी, ठहर सी गई है जिन्दगी,
चलाने हुनर जब भी निकला, घर के वास्ते।।

गिरा उठा, उठा गिरा, जीने के लिये कई बार मरा,
खड़ा ही पड़ा,हर बार मरा जिन्दगी के वास्ते ।।


सोमवार, 12 सितंबर 2022

मानव सेवा हेतु दिनांक १० सितम्बर २०२२

मैंने भी जलाई है ज्योति,

तुम रस बिखराओ तो सही,

इश्क़ भले अधूरा रह जाये,

प्यार होगा पूरा समर्पण का प्रण

निभाओ तो सही ।।


राह देखती है निगाहें गाहे–बघाये,

नज़र में आओ तो भान हो दिखे झलक ही सही

गलत सही का भेद समय बताता है,

जज़्बात सलामत कर कदम बढ़ाओ तो सही ।।


कर्म की गति बड़ी न्यारी है बड़ी प्यारी,

होगा प्रकाश जरूर दिया जलाओ तो सही,

पाप–पुण्य सब यही हैं पता चलेगा,

जीवन के दर्शन में एक बार नहाओ तो सही ।।


जीव तो जीव है प्यार करो अपनी जगह,

सदैव मंत्र रहा हमारा अतिथि देवो: भाव:,

भूल को भूलकर आत्मा को गुरुत्व कर,

बाल को पालकर मानव बनाओ तो सही ।।

रविवार, 12 जून 2022

नर और नारी जड़ चेतन दिनाँक १२ जून २०२२

बीज जगत में, 
एक नर बना एक नार,
नर नार बन जड़ चेतन,
नर जड़ बना वो पौधा,
प्रकृति से मिला जो दिया उसे,
खूब फूला फला वो जड़ के कारण,
नर सर्वस्व वारता रहा वो अपने को निखारता रहा,
नर जड़ ही रहा वो पत्ता तना फूल फल बन गया,
नर जड़ बन निष्ठुर सा तना रहा वो जग की ममता पार गया,
उपमाओं के खेल से लेकर सभी की भावनाओं तक सब मिला उसे,
नर जड़ था मूक देखता रहा अपने कर्म व भाग्य को वो अपने भाग्य पर नाज गया,
नर के कर्म से उत्पन्न रस को तरह तरह से भोगता रहा ओर नर बस मूक सोचता रहा,
यह नर था जो जड़ता रहा प्रत्येक परिस्थिति में और नार खिलता रहा ।।