सोमवार, 24 अप्रैल 2023

चाहत गीत – प्रेमी की चाहत में दिनाँक २२ अप्रैल २०२१

उसके बिन चुप चुप रहना अच्छा लगता है,
खामोशी से एक दर्द को सहना अच्छा लगता है।।

जिस हस्ती की याद में आँसू बरसते हैं,
सामने उसके कुछ ना कहना अच्छा लगता है।।

मिलकर उससे बिछड़ ना जायें डरते रहते हैं, 
इसलिये बस दूर ही रहना अच्छा लगता है।।

जी चाहे सारी खुशियाँ लाकर उसको दे दूँ,
उसके प्यार में सब कुछ खोना अच्छा लगता है।।

उसका मिलना ना मिलना किस्मत की बात है,
पल पल उसकी याद में खोना अच्छा लगता है।।

शनिवार, 18 मार्च 2023

सफ़र एक आईने से दिनॉक १९ मार्च २०२३

सफ़र को तुम भी खड़े थे, हम भी खड़े थे,
दोनों ही चलने को तैयार खड़े थे ।।

सफ़र दोनों का था एक ही जैसा,
दोनों के रास्ते कांटों भरे थे ।।

राहें सफ़र आसान न था दोनों के लिये,
हम प्यार संग चले तुम मतलब साथ चले थे।।

चुनी राह दोनों ने आगे बढ़ने की खातिर,
तुम ही क्यों ? निकले आगे, हम वहीं खड़े थे ।।

निकले जो आगे ध्यान उन्हीं पर था हमारा,
सशक्त हम ज्यादा थे, पर विभीषण तेरे संग चल पड़े थे ।।

देखा जो झाँककर अपने सफ़र को आईने में,
कुछ अपने ही थे जो टांग को खींचे पड़े थे ।।

जिन्दगी की दौड़ से हर बार पाया हमनें ये सबक,
"नादान" थे बड़े संजीदा,तुम मतलबी बड़े थे ।।

शुक्रवार, 17 मार्च 2023

जिन्दगी एक नजर में दिनॉक १७ मार्च २०२३

कभी इधर गया कभी उधर गया,
जिधर भी गया खराब थे उधर के रास्ते ।।

ढेर था विचारों का, हृदय उमंग भरा था,
न कह सका न सुन सका, मन भरा भरा था।।

शिकवा करता क्या किसी से सभी अपने थे,
बैठा जब भी खाली मन सुलझाने मन के फासले।।

कोशिश बेकार गयी हर बार, मुकम्मल करने की,
संजीदा जब भी हुआ, सुधार के वास्ते।।

चल रही है गाड़ी, ठहर सी गई है जिन्दगी,
चलाने हुनर जब भी निकला, घर के वास्ते।।

गिरा उठा, उठा गिरा, जीने के लिये कई बार मरा,
खड़ा ही पड़ा,हर बार मरा जिन्दगी के वास्ते ।।


सोमवार, 12 सितंबर 2022

मानव सेवा हेतु दिनांक १० सितम्बर २०२२

मैंने भी जलाई है ज्योति,

तुम रस बिखराओ तो सही,

इश्क़ भले अधूरा रह जाये,

प्यार होगा पूरा समर्पण का प्रण

निभाओ तो सही ।।


राह देखती है निगाहें गाहे–बघाये,

नज़र में आओ तो भान हो दिखे झलक ही सही

गलत सही का भेद समय बताता है,

जज़्बात सलामत कर कदम बढ़ाओ तो सही ।।


कर्म की गति बड़ी न्यारी है बड़ी प्यारी,

होगा प्रकाश जरूर दिया जलाओ तो सही,

पाप–पुण्य सब यही हैं पता चलेगा,

जीवन के दर्शन में एक बार नहाओ तो सही ।।


जीव तो जीव है प्यार करो अपनी जगह,

सदैव मंत्र रहा हमारा अतिथि देवो: भाव:,

भूल को भूलकर आत्मा को गुरुत्व कर,

बाल को पालकर मानव बनाओ तो सही ।।

रविवार, 12 जून 2022

नर और नारी जड़ चेतन दिनाँक १२ जून २०२२

बीज जगत में, 
एक नर बना एक नार,
नर नार बन जड़ चेतन,
नर जड़ बना वो पौधा,
प्रकृति से मिला जो दिया उसे,
खूब फूला फला वो जड़ के कारण,
नर सर्वस्व वारता रहा वो अपने को निखारता रहा,
नर जड़ ही रहा वो पत्ता तना फूल फल बन गया,
नर जड़ बन निष्ठुर सा तना रहा वो जग की ममता पार गया,
उपमाओं के खेल से लेकर सभी की भावनाओं तक सब मिला उसे,
नर जड़ था मूक देखता रहा अपने कर्म व भाग्य को वो अपने भाग्य पर नाज गया,
नर के कर्म से उत्पन्न रस को तरह तरह से भोगता रहा ओर नर बस मूक सोचता रहा,
यह नर था जो जड़ता रहा प्रत्येक परिस्थिति में और नार खिलता रहा ।।

शुक्रवार, 11 मार्च 2022

चोर खुद ही मचाता शोर दिनाँक १२ मार्च २०२२

चोर को सभी ओर,
नजर आते है चोर ही चोर,
चोर चोर चोर, 
चोर ही खुद मचाता शोर।। 

भीड़तंत्र में कुछ भो बोलो,
न कोई मतलब बस मुँह खोलो,
ऐ "नादान" जानता है, 
तंत्र में प्रजा है परेशां,
बस रख दुखती नश पर हाथ,
चारों ओर उलझाकर,
लोगों को बहकाकर,
मतलब सीधा करना है,
जो मरे सो मरे,
सीधा अपना उल्लू करना है,
जब तक न हो उल्लू सीधा,
तब तक करना शोर,
हो जाये जो उल्लू सीधा,
तब भी करना शोर,
कुछ का कुछ दिखाना है,
स्वप्न हसीन सजाना है,
स्वप्न तो स्वप्न है उनके लिये,
जो तेरे संग मचाते शोर,
जो तू बोले ज्यों मुँह खोले,
बिना सोचे संग संग बोले,
हरदम करते शोर,
ये तो नादान बहुत है,
स्वप्न से दिल पर चोट खाने तक,
अपना उल्लू सीधा हो जाने तक,
शोर मचाकर माल पाने तक,
आज नही तो कल के आसन तक,
बस करना है यही शोर,
चोर चोर चोर, 
चोर खुद भी मचाता शोर,
तुम भी मचाओ शोर,
चोर चोर चोर 
चोर खुद ही मचाता शोर ।।

मंगलवार, 22 फ़रवरी 2022

शर्म, दिनाँक २३ फरवरी २०२२

न देखिये आस-पास कुफ़्र न देखकर विनाश कीजिये,
उठा जो आचरण दिया ओर उठाकर विकास कीजिये।।
बड़ी मेहनत की थी सदियों की एहसास-ए-इज्ज़त सजाने में,
बनाकर जगह थेकली की, लगाकर न फिर नुमाइश कीजिये ।।
गिरकर न नज़रों से खत्म करो, अदब के खजाने को,
बन्दगी न करो न सही, शर्म है गहना तो शर्म कीजिये ।।

खानदान की कीमत पता चलती है हुस्न-ए-सलूक से,

अदब का हर पहलू इससे है, नजरों में थोड़ी हया कीजिये ।।

मिलती नही मन्जिल में बा-वफ़ा अब हर मुसाफ़िर से,
आजकल गुरबत में है "नादान" जरा ईनायत कीजिये ।।