सैन्यकर्मी है हम मंत्रालय रक्षा में अग्नि सुरक्षा के,
भारत की सेनाओं की संपदा व मानवीय अग्नि रक्षा के,
कर्तव्यपरायणता में काम नहीं सेना की किसी कोरों से,
फिर भी मात खा गये हम भारतीय गोरों से,
बावर्दी है हम सेना के हर कर्मी की भाँति,
सेना ही हमें सैल्यूट और ड्रिल सिखाती,
(जम्मू-कश्मीर से कन्याकुमारी तक)
अग्निसुरक्षा खातिर सेना साथ कदम से कदम मिलाती,
फिर भी हर कर्मचारी मायूसी में रहता है,
उत्तर में हर स्तर पर दोहरापन सहता है,
कर्मक्षेत्र में कर्मकारी बावर्दी कहलाता है,
वारी आती है जब लाभान्वित हो पाने की,
किसी कदम पर अधिकारों में सक्षम हो जाने की,
वर्दी वाला चेहरा फिर सिविलियन कहलाता है,
नवप्रशिक्षण से पदुन्नति शिक्षण तक हर कोर्स में,
लिया खंगाल सब सिलेबस, मिले सूत्र भौतिक,रसायन,गणित हर सोर्स में,
वृक्ष की जड़ से पत्ती,हर शाखा को वृक्ष से जाना है,
फिर क्यों अग्निरक्षा में उच्च को टेक्निकल (डिग्री को इंजीनियर) को निम्न को नोटैक्निकल माना है,
बन सेना का अंगी एक दिन, ख़ुशी छायी थी भारी,
क्रमबद्ध था अब तक सेना में (किसी स्तर पर)परिवारी,
"नादान" को कहाँ मालूम उस दिन खुद से छला गया,
जिस वर्दी को पूजन माना,उस पर सिविलियन लिखा गया,
शुक्रवार, 8 जुलाई 2016
अग्निकर्मी रक्षा मंत्रालय दिनाँक : ०८-०७-२०१६
गुरुवार, 7 जुलाई 2016
ईद दिनाँक - ०७ मई २०१६
आया ईद का त्यौहार आओ सब मिल इसे मनायें,
जिनसे रूठे है कल-परसों से उनको भी गले लगायें।।
ईद त्यौहार है इंसानियत और परस्पर सौहार्द का,
पड़ौसी हिन्दू है तो क्या, उसको भी ईदी दे आयें।।
आया ईद का....…..…......…..........................।।१।।
इरफ़ान भी याद दिलाता है सच्ची कुर्बानी के बाबत,
सबसे प्यारी है नफ़रत मुझे, आज उसकी कुर्बानी दे आयें।।
आया ईद का....…..…......…..........................।।२।।
अर्द्धनग्न बैठा है चौराहे पर तरसों से वो मजलूम,
चल उठ आज उसको भी नई लिबास पहना आयें।।
आया ईद का....…..…......…..........................।।३।।
मुफ़लिसी में है एक भूखा वो यार भी तेरा,
मज़हबी गैर से क्या, इंसानियत से उसको खाना खिलायें।।
आया ईद का....…..…......…..........................।।४।।
लिखने को तो लिख डालूँ ईद कैसे-कैसे मनायें,
सब समझदार है सिर्फ मै "नादान" शेष क्या समझायें।।
आया ईद का....…..…......…..........................।।५।।
शुक्रवार, 3 जून 2016
शीर्षक - दीवाना कवि नित्यानन्द जी के आदेश पर 03 जून 2016
मुझे मेरे जज्बात ने जीना सिखा दिया,
ठोकरों ने मुझे जहाँ की चलना सिखा दिखा,
दिया जो ज्ञान मात-पिता ने जन्म माटी के कृतार्थ का,
देश भक्ति आ गयी ऐसी रगों में दीवाना बना दिया,
दुनियाँ ने गए गीत प्यार व वफ़ा के,
कवियों ने भी जज्बात उकेरे कलम से जवाँ के,
दिलों में मोहब्बत की ऐसी खायी बनायीं वीर रसियों ने,
देश के दुश्मनों के छक्के छुड़ानें का दीवाना बना दिया,
सत्य और अनुशासन की बन्ध डोर से,
जीवन को चलाने जो चला उस छोर इस छोर से,
सत्ता के लोभियों ने खून से खून पर नफरत का रंग चढ़ा दिया,
"नादान" ने आईना दिखाने को कलम का दीवाना बना लिया।
सोमवार, 25 अप्रैल 2016
सुन्दरता को देखकर मन की आकांक्षा दिनाँक 26 अप्रैल 2016
तुम खुशबू हो या परी हो,
मेरे दिल की फूल झड़ी हो,
मै गागर हूँ शून्य रिक्त,
तुम सागर सी भरी हो।।
तुम प्यार की मूरत हो,
मेरे सपनों की सूरत हो,
देखकर जिसे प्रफुल्लित हो जाऊं,
वो हँसी मूरत हो।।
ख्यालों में लेकर जब बैठूँ,
मै कलम लिखने को,
"नादान" को मिले शब्दों की,
तुम पावन कविता हो।।
जब से देखा है तुमको,
सब निर्झर लगता है,
आ जाओ जीवन में,
तो सुहाना सावन हो।।
मंगलवार, 16 फ़रवरी 2016
शिक्षा जे0एन0यू0 प्रकरण 16 फरवरी2016
हर कोई मस्जिद में बैठा,इमाम नहीं हो सकता,
जिसका ईमान हो गिरा,वो मुसलमान नहीं हो सकता।
तिलक लगाकर पूजा करता मंदिर में,जरूरी नहीं पुजारी हो,
जो हत्यारा हो मानवता का,वो इंसान नहीं हो सकता।।
जो भाव में भी ताव दे और सीख दे हर बात में,
संस्कारों की बात करे और इज्जत नीलाम करे बाजार में।
धर्म ज्ञान को सामने रखकर, अधर्मी कर्म करता हो,
जो जान ना पायें मर्म इंसा का, वो विद्वानी नहीं हो सकता।।
प्रहरी हो जो देश के,अलग - अलग भेष में,
जान हथेली पर रखकर, हरदम चलते जोश में।
उनकी करनी को न्याय पूर्ति करने को स्वार्थ की खातिर तौल दे,
पहनकर चौला भारती का बोलो जो दुश्मन की भाषा वो देशभक्त नहीं हो सकता।।
कैसे कोई ज्ञान केंद्र में विद्रोह की भाषा बोल गया,
हो सकता है राजनीति के समर शेष में शक्ति तुला को तौल गया।
जरूरी नहीं जो उतारे जो चीर को वही दुःशासन हो,
कदम है जिसके वह बढ़ चले आँचल के उतरन को उसका सत्कार नहीं हो सकता।।
बुधवार, 27 जनवरी 2016
नववर्ष की बेला 01 जनवरी 2016
शुभप्रभात शुभदिवस शुभनववर्ष
बेला है नववर्ष की चलो ख़ुशी मनाये,
ध्येय धरे हम नेह की मंगल कामना गाये||
हो ऐसा ये वर्ष हमारा,मानव जाति प्रफुल्लित हो,
भारत बनें सिरमौर विश्व का, चहु ओर ख्याति छाये||
बेला है नववर्ष की चलो....................||1||
युवा चले सतकर्मो की ओर, वर्द्ध धर्म मार्ग दिखलायें,
शिशु हो जायें संस्कारी,ऐसी शिक्षा नीति अपनाये||
बेला है नववर्ष की चलो....................||2||
विज्ञानी नित करें चमत्कार,दशों दिशाएँ चकराये,
रक्षा,चिकत्सा,भरण-पोषण,सब पूर्ण हो जाएँ।।
बेला है नववर्ष की चलो....................||3||
स्पर्धी ऐसे हो क्रीडभारती,नित नये आयाम बनायें,
पछाड़ रूस,चीन को,हर खेल में ओलम्पियन बन जायें||
बेला है नववर्ष की चलो....................||4||
जीवन शैली हो धर्म हमारा,यह सब जन जायें,
आर्यन बन सब मानव सत्कर्मो में ढल जाये।।
बेला है नववर्ष की चलो....................||5||
कल्पना कर रहा "नादान" काश ऐसी छवि बन जायें,
हो जायें स्वपन सारे साकार,हम फिर विश्व गुरु कहलायें||
बेला है नववर्ष की चलो....................||6||
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पुष्पेन्द्र सिँह मलिक "नादान"
गुरुवार, 31 दिसंबर 2015
अलविदा पुरातन 31 दिसंबर 2015
बीत गया जो बीत गया,वो समझो एक सपना है,
आगे देखो मंजिल है बाकि,जो शेष है वही अपना है||
क्या खोया क्या पाया हमने,हिसाब ये इतिहास करेगा,
कर्तव्यबोध से जो मुकाम, भविष्य मे यक्ष दिखना है||
बीत गया जो बीत गया.......................||1|
रच रहे है जो आज नींव,कल के स्वपन सजाने को,
कमी रह गयी जो बुनियादों में,उसको दूर कल करना है||
बीत गया जो बीत गया.......................||2||
बन गया जो विक्षोभ यहाँ पर,कलंकित हुई जिससे मानव जाति,
बन गयी जो दीवार यहाँ पे,चूक हुयी कहाँ उसका पता लगाना है||
बीत गया जो बीत गया.......................||3||
चूके थे जिस छोर पे हम, उस पर ध्यान लगाना है,
शिक्षा की अलख जगा जगाकर,मन का भेद मिटा उसको दूर गिराना है||
बीत गया जो बीत गया.......................||4||